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| | ===TPCK फ़्रेमवर्क क्या है?=== | | ===TPCK फ़्रेमवर्क क्या है?=== |
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| − | Technological Pedagogical Content Knowledge (TPCK) फ़्रेमवर्क उन अलग-अलग तरह के ज्ञान के हिस्सों को बताता है जो एक टीचर के लिए अपनी टीचिंग प्रैक्टिस में टेक्नोलॉजी को असरदार ढंग से शामिल करने के लिए ज़रूरी हैं, और साथ ही यह उनके आपसी तालमेल को भी समझाता है। मैथ्यू कोहलर और पुण्य मिश्रा द्वारा विकसित TPCK या TPACK, ली शुल्मन के 'पेडागोजिकल कंटेंट नॉलेज' (PCK) के विचार पर आधारित है। यह विचार कहता है कि किसी विषय के बारे में टीचर का ज्ञान, पढ़ाने और मूल्यांकन (असेसमेंट) के तरीकों की जानकारी, छात्रों का पहले से मौजूद ज्ञान और क्लासरूम का माहौल - ये सभी टीचिंग-लर्निंग प्रोसेस के दौरान एक साथ मिलकर काम करते हैं और एक-दूसरे से अलग नहीं होते। TPCK फ़्रेमवर्क यह समझने और सिद्धांत बनाने में मदद करता है कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कैसे टीचर के 'पेडागोजिकल कंटेंट नॉलेज' पर असर डालता है और उसे बदलता है, और इसका उल्टा भी कैसे होता है। यह टीचर की तैयारी और क्लासरूम में टेक्नोलॉजी के किसी खास इस्तेमाल की प्रासंगिकता या असरदार होने का मूल्यांकन करने का एक ज़रिया बन सकता है।
| + | टेक्नोलॉजिकल शिक्षणशास्त्रीय विषय-वस्तु ज्ञान (TPCK) रूपरेखा उन विभिन्न ज्ञान घटकों को परिभाषित करती है, जो किसी शिक्षक के लिए अपनी शिक्षण प्रक्रिया में टेक्नोलॉजि का प्रभावी ढंग से एकीकरण करने तथा उन ज्ञान घटकों के बीच होने वाली अंतःक्रिया (परस्पर संबंध) को समझने के लिए आवश्यक होते हैं। मैथ्यू कोहलर (Matthew Koehler) और पुन्या मिश्रा (Punya Mishra) द्वारा विकसित टीपीसीके (TPCK) या टीपैक (TPACK), ली शुलमैन (Lee Shulman) की शिक्षाशास्त्रीय विषय-वस्तु ज्ञान (PCK) की अवधारणा पर आधारित है। इस अवधारणा के अनुसार, किसी शिक्षक का विषय का ज्ञान, शिक्षण एवं मूल्यांकन की रणनीतियों का ज्ञान, विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान तथा कक्षा की परिस्थितियों का ज्ञान—ये सभी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में मिलकर कार्य करते हैं। ये एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि परस्पर जुड़े हुए होते हैं। टीपीसीके (TPCK) रूपरेखा यह सैद्धांतिक रूप से समझने तथा व्याख्या करने मेंसहायता करती है कि टेक्नोलॉजि को शिक्षण में शामिल करने से शिक्षक के शिक्षाशास्त्रीय विषय-वस्तु ज्ञान (PCK) पर क्या प्रभाव पड़ता है और उसमें किस प्रकार परिवर्तन आता है। इसी प्रकार, शिक्षक का यह ज्ञान भी टेक्नोलॉजि के उपयोग को प्रभावित करता है। यह रूपरेखा यह आकलन करने में भी उपयोगी है कि शिक्षक टेक्नोलॉजि के उपयोग के लिए कितने तैयार हैं तथा कक्षा में टेक्नोलॉजि का उपयोग कितना उपयुक्त और प्रभावी है। |
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| − | === विषयवस्तु ज्ञान (CK) ===
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| − | * सीखी या पढ़ाई जाने वाली '''विषयवस्तु''' के बारे में ज्ञान।
| + | === विषय-वस्तु का ज्ञान (CK) === |
| − | * इसमें '''अवधारणाओं, सिद्धांतों, विचारों, संगठनात्मक ढाँचों, प्रमाण और सत्यापन के ज्ञान''' के साथ-साथ ऐसे ज्ञान को विकसित करने की दिशा में '''स्थापित प्रथाओं और दृष्टिकोणों''' का ज्ञान शामिल है।
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| − | === शैक्षणिक ज्ञान (PK) ===
| + | * सीखे या सिखाए जाने वाले विषय के बारे में जानकारी। |
| | + | * इसमें अवधारणाओं(Content), सिद्धांतों, विचारों, संगठनात्मक ढांचे, साक्ष्यों और प्रमाणों की ज्ञान, और साथ ही ऐसे ज्ञान को विकसित करने के स्थापित प्रथाओं और दृष्टिकोणों की जानकारी शामिल है। |
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| − | * शिक्षण और अधिगम की '''प्रक्रियाओं और प्रथाओं''' या '''विधियों''' के बारे में ज्ञान।
| + | === शिक्षण-विधि ज्ञान (PK) === |
| − | * इसमें समग्र '''शैक्षिक उद्देश्यों, मूल्यों और लक्ष्यों''' को शामिल किया जाता है।
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| − | * यह समझने में लागू होता है कि '''विद्यार्थी कैसे सीखते हैं, सामान्य कक्षा प्रबंधन कौशल, पाठ योजना, और विद्यार्थी मूल्यांकन'''।
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| − | === शैक्षणिक विषयवस्तु ज्ञान===
| + | * पढ़ाने और सीखने की प्रक्रियाओं, तौर-तरीकों या विधियों के बारे में ज्ञान। |
| | + | * इसमें शिक्षा के समग्र उद्देश्यों, मूल्यों और लक्ष्यों को समावेश होता है।। |
| | + | * इसमें यह समझ शामिल है कि विद्यार्थी कैसे सीखते हैं, कक्षा का प्रभावी प्रबंधन कैसे किया जाए, पाठ योजना कैसे बनाई जाए तथा विद्यार्थियों का मूल्यांकन कैसे किया जाए। |
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| − | * शिक्षण के लिए विषयवस्तु का '''रूपांतरण''' जो तब होता है जब शिक्षक विषयवस्तु की '''व्याख्या करता है,''' उसे प्रस्तुत करने के '''कई तरीके खोजता है,''' और अनुदेशात्मक सामग्री को वैकल्पिक अवधारणाओं तथा विद्यार्थियों के पूर्व-ज्ञान के अनुरूप '''ढालता और अनुकूलित''' करता है। Shulman (1986)
| + | === शिक्षण-विधि और विषय-वस्तु का समन्वित ज्ञान (PCK)=== |
| − | * PCK शिक्षण, अधिगम, पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और रिपोर्टिंग के मूल कार्य को कवर करता है, जैसे कि '''वे परिस्थितियाँ जो सीखने को बढ़ावा देती हैं और पाठ्यक्रम, मूल्यांकन तथा शिक्षाशास्त्र के बीच की कड़ियाँ''' (Koehler & Mishra, 2009)
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| − | === तकनीकी ज्ञान (TK) ===
| + | * शिक्षण के लिए विषय-वस्तु का रूपांतरण वह प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षक विषय-वस्तु को समझकर उसे विभिन्न तरीकों से प्रस्तुत करता है तथा विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान और उनकी समझ के स्तर के अनुसार शिक्षण सामग्री में आवश्यक परिवर्तन करता है। |
| | + | * PCK में पढ़ाने-सीखने, पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और रिपोर्टिंग के मुख्य काम शामिल हैं, जैसे कि सीखने को बढ़ावा देने वाली स्थितियां और पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और शिक्षण-विधि के बीच संबंध (कोहलर और मिश्रा, 2009)। |
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| − | * तकनीक, उपकरणों और संसाधनों के बारे में '''सोचने और उनके साथ काम करने''' के कुछ तरीके विकसित करना
| + | === टेक्नोलॉजिकल ज्ञान (TK) === |
| − | * सूचना प्रौद्योगिकी को इतनी व्यापक रूप से समझना कि इसे कार्यस्थल और दैनिक जीवन में उत्पादक रूप से लागू किया जा सके
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| − | * यह '''पहचानने की क्षमता कि सूचना प्रौद्योगिकी किसी लक्ष्य की प्राप्ति में कब सहायता कर सकती है या बाधा डाल सकती है'''
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| − | * सूचना प्रौद्योगिकी में होने वाले '''परिवर्तनों के साथ निरंतर तालमेल बिठाने''' की क्षमता
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| − | * एक शिक्षक को डिजिटल तकनीकों के उपयोग में ज्ञान और कौशल विकसित करने की आवश्यकता है
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| − | === तकनीकी विषयवस्तु ज्ञान (TCK) ===
| + | * टेक्नोलॉजिकल, उपकरणों और संसाधनों के बारे में उपयुक्त सोच विकसित करना तथा उनका प्रभावी ढंग से उपयोग करना सीखना। |
| | + | * सूचना टेक्नोलॉजि को इतनी अच्छी तरह समझना कि उसका उपयोग कार्य और दैनिक जीवन में प्रभावी रूप से किया जा सके। |
| | + | * यह समझने की क्षमता कि सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग किसी लक्ष्य को प्राप्त करने में कब मददगार होता है और कब वह बाधा बन सकता है। |
| | + | * सूचना टेक्नोलॉजि में होने वाले बदलावों के साथ स्वयं को लगातार ढालने की क्षमता। |
| | + | * एक शिक्षक के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजि का प्रभावी उपयोग करने हेतु आवश्यक ज्ञान और कौशल विकसित करना आवश्यक है। |
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| − | * यह समझना कि '''उनके क्षेत्रों में विषयवस्तु-संबंधी अधिगम को संबोधित करने के लिए कौन-सी विशिष्ट तकनीकें सबसे उपयुक्त हैं''' और '''विषयवस्तु किस प्रकार तकनीक को निर्धारित या यहाँ तक कि परिवर्तित भी कर सकती है'''—या इसके विपरीत" (Koehler & Mishra, 2009)।
| + | === टेक्नोलॉजिकल विषय-वस्तु ज्ञान(TCK) === |
| − | * '''तकनीक का मूल्यांकन''' इस दृष्टि से करना कि कौन-सी विषयवस्तु किस प्रकार प्रस्तुत की गई है; यह मूल्यांकन करना कि कौन-सी तकनीकें विषयवस्तु की आवश्यकताओं के लिए सबसे उपयुक्त हैं
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| − | * एक शिक्षक CK को बेहतर बनाने के लिए '''डिजिटल तकनीकों''' का उपयोग कर सकता है
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| − | ** इंटरनेट और डिजिटल भंडारों से '''विषयवस्तु तक पहुँच'''
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| − | ** व्यक्तिगत भंडारों में '''ज्ञान का संग्रहण'''
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| − | * विषयवस्तु को '''निर्मित और प्रासंगिक बनाना'''
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| − | ** पाठ, चित्र, ऑडियो, वीडियो, एनिमेशन और मल्टीमीडिया जैसे '''नए डिजिटल संसाधन बनाना'''
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| − | ** विषयवस्तु को '''प्रासंगिक बनाना (अनुकूलित/संशोधित करना)'''
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| − | === तकनीकी शैक्षणिक ज्ञान (TPK) ===
| + | * "टेक्नोलॉजिकल विषय-वस्तु ज्ञान (Technological Content Knowledge – TCK) का अर्थ यह समझना है कि किसी विशिष्ट विषय-क्षेत्र में विषय-वस्तु के अधिगम के लिए कौन-सी प्रौद्योगिकियाँ सबसे उपयुक्त हैं तथा यह भी समझना कि विषय-वस्तु प्रौद्योगिकी के चयन और उपयोग को किस प्रकार निर्धारित करती है या उसमें परिवर्तन ला सकती है—या इसके विपरीत, प्रौद्योगिकी विषय-वस्तु को किस प्रकार प्रभावित या परिवर्तित कर सकती है।" |
| − | यह समझ कि '''विशिष्ट तकनीकों के विशिष्ट तरीकों से उपयोग किए जाने पर शिक्षण और अधिगम किस प्रकार बदल सकते हैं।''' इसमें अनुशासन तथा विकासात्मक दृष्टि से उपयुक्त शैक्षणिक डिज़ाइनों और रणनीतियों से संबंधित '''विभिन्न तकनीकी उपकरणों की शैक्षणिक संभावनाओं और सीमाओं''' को जानना शामिल है" (Koehler & Mishra, 2009)। | + | * टेक्नोलॉजिकल का मूल्यांकन इस आधार पर करें कि वह किस विषय-वस्तु (Content) का प्रतिनिधित्व करती है और उसे किस प्रकार प्रस्तुत करती है। |
| | + | * एक शिक्षक अपनी विषय-वस्तु संबंधी ज्ञान (Content Knowledge - CK) को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर सकता/सकती है। |
| | + | ** इंटरनेट तथा डिजिटल भंडारों (Digital Repositories) से विषय-वस्तु तक पहुँच प्राप्त कर सकता/सकती है। |
| | + | ** अपने व्यक्तिगत डिजिटल भंडार (Personal Repositories) में ज्ञान एवं सामग्री को सुरक्षित संग्रहीत कर सकता/सकती है। |
| | + | * विषय-वस्तु (कंटेंट) का सृजन करें तथा उसे संदर्भानुकूल (प्रासंगिक) बनाएँ। |
| | + | ** पाठ, चित्र, ऑडियो, वीडियो, एनिमेशन और मल्टीमीडिया जैसी नई डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करें। |
| | + | ** नए डिजिटल संसाधनों का सृजन करें – जैसे पाठ (टेक्स्ट), चित्र, ऑडियो, वीडियो, एनिमेशन तथा मल्टीमीडिया सामग्री। |
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| − | * शैक्षणिक दृष्टिकोण और रणनीतियाँ इस आधार पर निर्धारित की जाती हैं कि विषय और शैक्षिक/विकासात्मक अवस्था के लिए क्या उपयुक्त है।
| + | === टेक्नोलॉजिकल शिक्षण-विधि ज्ञान (TPK) === |
| − | * '''विभिन्न तकनीकें अलग-अलग शैक्षणिक संभावनाएँ प्रदान कर सकती हैं और अलग-अलग शिक्षाशास्त्रों को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का समर्थन करने के लिए अलग-अलग प्रकार की तकनीकों की आवश्यकता होती है'''
| + | यह समझ कि विशेष प्रौद्योगिकियों का विशेष तरीकों से उपयोग करने पर शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया में किस प्रकार परिवर्तन आता है। इसमें विभिन्न तकनीकी उपकरणों की शैक्षणिक संभावनाओं और सीमाओं को समझना तथा यह जानना शामिल है कि उन्हें विषय और विद्यार्थियों के विकास स्तर के अनुसार उपयुक्त शिक्षण योजनाओं एवं रणनीतियों में कैसे प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए। (कोहलर एवं मिश्रा, 2009) |
| − | * TPK की समझ शिक्षक का मार्गदर्शन करती है '''उस तकनीकी उपकरण और शैक्षणिक डिज़ाइन को चुनने में जो विषयवस्तु के अधिगम को प्रभावी ढंग से समर्थन देने के लिए एक-दूसरे के साथ सबसे अच्छी तरह मेल खाते हैं'''
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| − | * एक अच्छा शिक्षक अपने PK को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर सकता है
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| − | === तकनीकी शैक्षणिक विषयवस्तु ज्ञान (TPACK) ===
| + | * शिक्षण उपागम और रणनीतियाँ विषय तथा विद्यार्थियों के शैक्षिक और विकासात्मक स्तर के अनुसार निर्धारित की जाती हैं। |
| − | TPACK तीनों अवधारणाओं के अलग-अलग ज्ञान से भिन्न है। यह तकनीक के साथ प्रभावी शिक्षण का आधार बनाता है, जिसके लिए तकनीकों का उपयोग करते हुए अवधारणाओं के निरूपण की समझ; विषयवस्तु सिखाने के लिए तकनीकों का रचनात्मक ढंग से उपयोग करने वाली शैक्षणिक तकनीकों की समझ आवश्यक है;
| + | * अलग-अलग टेक्नोलॉजिकल अलग-अलग शिक्षण संभावनाएँ प्रदान करती हैं, और विभिन्न शिक्षण विधियों को प्रभावी बनाने के लिए अलग-अलग प्रकार की प्रौद्योगिकियों का उपयोग आवश्यक होता है। |
| | + | * टेक्नोलॉजिकल-शैक्षणिक ज्ञान (TPK) शिक्षक को ऐसी प्रौद्योगिकी और शिक्षण पद्धति चुनने में सहायता करता है, जो एक-दूसरे के साथ अच्छी तरह मेल खाएँ और विद्यार्थियों के विषय-अधिगम को अधिक प्रभावी बनाएँ। |
| | + | * एक अच्छा शिक्षक डिजिटल टेक्नोलॉजिकल का उपयोग करके अपने शैक्षणिक ज्ञान (Pedagogical Knowledge) को समृद्ध और अधिक प्रभावी बना सकता/सकती है। |
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| − | Koehler & Mishra के शब्दों में, TPCK "यह ज्ञान है कि कौन-सी अवधारणाएँ सीखने में कठिन या आसान होती हैं और तकनीक विद्यार्थियों के सामने आने वाली कुछ समस्याओं को हल करने में किस प्रकार सहायक हो सकती है; विद्यार्थियों के पूर्व-ज्ञान और ज्ञानमीमांसा के सिद्धांतों का ज्ञान; और यह ज्ञान कि तकनीकों का उपयोग मौजूदा ज्ञान पर आधारित नई ज्ञानमीमांसाएँ विकसित करने या पुरानी को मजबूत करने के लिए किस प्रकार किया जा सकता है"
| + | === टेक्नोलॉजिकल शिक्षण-विधि और विषय-वस्तु का समन्वित ज्ञान (TPACK) === |
| | + | TPACK केवल प्रौद्योगिकी, शिक्षाशास्त्र और विषय-वस्तु के अलग-अलग ज्ञान का योग नहीं है, बल्कि इन तीनों के समन्वित एवं एकीकृत ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। इसके लिए निम्नलिखित बातों की समझ आवश्यक है: |
| | + | प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके विषय-वस्तु की अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना। |
| | + | विषय-वस्तु के शिक्षण के लिए प्रौद्योगिकियों का रचनात्मक एवं प्रभावी उपयोग करने वाली शैक्षणिक तकनीकों (Pedagogical Techniques) का ज्ञान। |
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| | + | कोहलर एवं मिश्रा के अनुसार, TPACK (Technological Pedagogical Content Knowledge) वह ज्ञान है जिसमें यह समझ शामिल होती है कि कौन-सी अवधारणाएँ सीखने में कठिन या सरल होती हैं, और प्रौद्योगिकी विद्यार्थियों के सामने आने वाली कुछ सीखने संबंधी कठिनाइयों को दूर करने में किस प्रकार सहायता कर सकती है। इसमें विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान (Prior Knowledge) तथा ज्ञानमीमांसा (Epistemology) से संबंधित उनके दृष्टिकोण का ज्ञान भी शामिल है। साथ ही, यह भी समझ शामिल है कि प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके विद्यार्थियों के वर्तमान ज्ञान के आधार पर नए ज्ञान का निर्माण कैसे किया जाए या उनके पूर्व ज्ञान को और अधिक सुदृढ़ कैसे बनाया जाए। |
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| | ==== TPACK प्रकृति में गतिशील है ==== | | ==== TPACK प्रकृति में गतिशील है ==== |
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