टेक्नोलॉजिकल शिक्षणशास्त्रीय विषय-वस्तु ज्ञान रूपरेखा

मुक्त शैक्षणिक संसाधन से
Suchithra (वार्ता | योगदान) द्वारा परिवर्तित १०:५०, ६ अगस्त २०२६ का अवतरण ('[https://koer-en.karnatakaeducation.org.in/index.php/Technological_Pedagogical_Content_Knowledge_(TPCK)_Framework See in English] ===...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ

See in English

TPCK फ़्रेमवर्क क्या है?

टेक्नोलॉजिकल शिक्षणशास्त्रीय विषय-वस्तु ज्ञान (TPCK) रूपरेखा उन विभिन्न ज्ञान घटकों को परिभाषित करती है, जो किसी शिक्षक के लिए अपनी शिक्षण प्रक्रिया में टेक्नोलॉजि का प्रभावी ढंग से एकीकरण करने तथा उन ज्ञान घटकों के बीच होने वाली अंतःक्रिया (परस्पर संबंध) को समझने के लिए आवश्यक होते हैं। मैथ्यू कोहलर (Matthew Koehler) और पुन्या मिश्रा (Punya Mishra) द्वारा विकसित टीपीसीके (TPCK) या टीपैक (TPACK), ली शुलमैन (Lee Shulman) की शिक्षाशास्त्रीय विषय-वस्तु ज्ञान (PCK) की अवधारणा पर आधारित है। इस अवधारणा के अनुसार, किसी शिक्षक का विषय का ज्ञान, शिक्षण एवं मूल्यांकन की रणनीतियों का ज्ञान, विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान तथा कक्षा की परिस्थितियों का ज्ञान—ये सभी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में मिलकर कार्य करते हैं। ये एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि परस्पर जुड़े हुए होते हैं। टीपीसीके (TPCK) रूपरेखा यह सैद्धांतिक रूप से समझने तथा व्याख्या करने मेंसहायता करती है कि टेक्नोलॉजि को शिक्षण में शामिल करने से शिक्षक के शिक्षाशास्त्रीय विषय-वस्तु ज्ञान (PCK) पर क्या प्रभाव पड़ता है और उसमें किस प्रकार परिवर्तन आता है। इसी प्रकार, शिक्षक का यह ज्ञान भी टेक्नोलॉजि के उपयोग को प्रभावित करता है। यह रूपरेखा यह आकलन करने में भी उपयोगी है कि शिक्षक टेक्नोलॉजि के उपयोग के लिए कितने तैयार हैं तथा कक्षा में टेक्नोलॉजि का उपयोग कितना उपयुक्त और प्रभावी है।


विषय-वस्तु का ज्ञान (CK)

  • सीखे या सिखाए जाने वाले विषय के बारे में जानकारी।
  • इसमें अवधारणाओं(Content), सिद्धांतों, विचारों, संगठनात्मक ढांचे, साक्ष्यों और प्रमाणों की ज्ञान, और साथ ही ऐसे ज्ञान को विकसित करने के स्थापित प्रथाओं और दृष्टिकोणों की जानकारी शामिल है।

शिक्षण-विधि ज्ञान (PK)

  • पढ़ाने और सीखने की प्रक्रियाओं, तौर-तरीकों या विधियों के बारे में ज्ञान।
  • इसमें शिक्षा के समग्र उद्देश्यों, मूल्यों और लक्ष्यों को समावेश होता है।।
  • इसमें यह समझ शामिल है कि विद्यार्थी कैसे सीखते हैं, कक्षा का प्रभावी प्रबंधन कैसे किया जाए, पाठ योजना कैसे बनाई जाए तथा विद्यार्थियों का मूल्यांकन कैसे किया जाए।

शिक्षण-विधि और विषय-वस्तु का समन्वित ज्ञान (PCK)

  • शिक्षण के लिए विषय-वस्तु का रूपांतरण वह प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षक विषय-वस्तु को समझकर उसे विभिन्न तरीकों से प्रस्तुत करता है तथा विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान और उनकी समझ के स्तर के अनुसार शिक्षण सामग्री में आवश्यक परिवर्तन करता है।
  • PCK में पढ़ाने-सीखने, पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और रिपोर्टिंग के मुख्य काम शामिल हैं, जैसे कि सीखने को बढ़ावा देने वाली स्थितियां और पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और शिक्षण-विधि के बीच संबंध (कोहलर और मिश्रा, 2009)।

टेक्नोलॉजिकल ज्ञान (TK)

  • टेक्नोलॉजिकल, उपकरणों और संसाधनों के बारे में उपयुक्त सोच विकसित करना तथा उनका प्रभावी ढंग से उपयोग करना सीखना।
  • सूचना टेक्नोलॉजि को इतनी अच्छी तरह समझना कि उसका उपयोग कार्य और दैनिक जीवन में प्रभावी रूप से किया जा सके।
  • यह समझने की क्षमता कि सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग किसी लक्ष्य को प्राप्त करने में कब मददगार होता है और कब वह बाधा बन सकता है।
  • सूचना टेक्नोलॉजि में होने वाले बदलावों के साथ स्वयं को लगातार ढालने की क्षमता।
  • एक शिक्षक के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजि का प्रभावी उपयोग करने हेतु आवश्यक ज्ञान और कौशल विकसित करना आवश्यक है।

टेक्नोलॉजिकल विषय-वस्तु ज्ञान(TCK)

  • "टेक्नोलॉजिकल विषय-वस्तु ज्ञान (Technological Content Knowledge – TCK) का अर्थ यह समझना है कि किसी विशिष्ट विषय-क्षेत्र में विषय-वस्तु के अधिगम के लिए कौन-सी प्रौद्योगिकियाँ सबसे उपयुक्त हैं तथा यह भी समझना कि विषय-वस्तु प्रौद्योगिकी के चयन और उपयोग को किस प्रकार निर्धारित करती है या उसमें परिवर्तन ला सकती है—या इसके विपरीत, प्रौद्योगिकी विषय-वस्तु को किस प्रकार प्रभावित या परिवर्तित कर सकती है।"
  • टेक्नोलॉजिकल का मूल्यांकन इस आधार पर करें कि वह किस विषय-वस्तु (Content) का प्रतिनिधित्व करती है और उसे किस प्रकार प्रस्तुत करती है।
  • एक शिक्षक अपनी विषय-वस्तु संबंधी ज्ञान (Content Knowledge - CK) को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर सकता/सकती है।
    • इंटरनेट तथा डिजिटल भंडारों (Digital Repositories) से विषय-वस्तु तक पहुँच प्राप्त कर सकता/सकती है।
    • अपने व्यक्तिगत डिजिटल भंडार (Personal Repositories) में ज्ञान एवं सामग्री को सुरक्षित संग्रहीत कर सकता/सकती है।
  • विषय-वस्तु (कंटेंट) का सृजन करें तथा उसे संदर्भानुकूल (प्रासंगिक) बनाएँ।
    • पाठ, चित्र, ऑडियो, वीडियो, एनिमेशन और मल्टीमीडिया जैसी नई डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करें।
    • नए डिजिटल संसाधनों का सृजन करें – जैसे पाठ (टेक्स्ट), चित्र, ऑडियो, वीडियो, एनिमेशन तथा मल्टीमीडिया सामग्री।

टेक्नोलॉजिकल शिक्षण-विधि ज्ञान (TPK)

यह समझ कि विशेष प्रौद्योगिकियों का विशेष तरीकों से उपयोग करने पर शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया में किस प्रकार परिवर्तन आता है। इसमें विभिन्न तकनीकी उपकरणों की शैक्षणिक संभावनाओं और सीमाओं को समझना तथा यह जानना शामिल है कि उन्हें विषय और विद्यार्थियों के विकास स्तर के अनुसार उपयुक्त शिक्षण योजनाओं एवं रणनीतियों में कैसे प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए। (कोहलर एवं मिश्रा, 2009)

  • शिक्षण उपागम और रणनीतियाँ विषय तथा विद्यार्थियों के शैक्षिक और विकासात्मक स्तर के अनुसार निर्धारित की जाती हैं।
  • अलग-अलग टेक्नोलॉजिकल अलग-अलग शिक्षण संभावनाएँ प्रदान करती हैं, और विभिन्न शिक्षण विधियों को प्रभावी बनाने के लिए अलग-अलग प्रकार की प्रौद्योगिकियों का उपयोग आवश्यक होता है।
  • टेक्नोलॉजिकल-शैक्षणिक ज्ञान (TPK) शिक्षक को ऐसी प्रौद्योगिकी और शिक्षण पद्धति चुनने में सहायता करता है, जो एक-दूसरे के साथ अच्छी तरह मेल खाएँ और विद्यार्थियों के विषय-अधिगम को अधिक प्रभावी बनाएँ।
  • एक अच्छा शिक्षक डिजिटल टेक्नोलॉजिकल का उपयोग करके अपने शैक्षणिक ज्ञान (Pedagogical Knowledge) को समृद्ध और अधिक प्रभावी बना सकता/सकती है।

टेक्नोलॉजिकल शिक्षण-विधि और विषय-वस्तु का समन्वित ज्ञान (TPACK)

TPACK केवल प्रौद्योगिकी, शिक्षाशास्त्र और विषय-वस्तु के अलग-अलग ज्ञान का योग नहीं है, बल्कि इन तीनों के समन्वित एवं एकीकृत ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। इसके लिए निम्नलिखित बातों की समझ आवश्यक है: प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके विषय-वस्तु की अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना। विषय-वस्तु के शिक्षण के लिए प्रौद्योगिकियों का रचनात्मक एवं प्रभावी उपयोग करने वाली शैक्षणिक तकनीकों (Pedagogical Techniques) का ज्ञान।


कोहलर एवं मिश्रा के अनुसार, TPACK (Technological Pedagogical Content Knowledge) वह ज्ञान है जिसमें यह समझ शामिल होती है कि कौन-सी अवधारणाएँ सीखने में कठिन या सरल होती हैं, और प्रौद्योगिकी विद्यार्थियों के सामने आने वाली कुछ सीखने संबंधी कठिनाइयों को दूर करने में किस प्रकार सहायता कर सकती है। इसमें विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान (Prior Knowledge) तथा ज्ञानमीमांसा (Epistemology) से संबंधित उनके दृष्टिकोण का ज्ञान भी शामिल है। साथ ही, यह भी समझ शामिल है कि प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके विद्यार्थियों के वर्तमान ज्ञान के आधार पर नए ज्ञान का निर्माण कैसे किया जाए या उनके पूर्व ज्ञान को और अधिक सुदृढ़ कैसे बनाया जाए।

TPACK प्रकृति में गतिशील है

Dynamic Nature of TPACK.png